कुरेदो उन खराशों को, बरसों से वहीं हैं
ना गायब होती हैं, ना दर्द होता है
कुरेदो, देखें क्या है भीतर
शायद चोट अभी कायम है
क्या पता, खराशों की परतें जम गयी हैं
कुरेदो जज़्बातों को
कभी जज़्बाती नही होते?
आँखों में गहराई है
कहती है शायद चोट अभी कायम है
क्यूँ जीना है यूँ खराशों से?
छीलो इन परतों को,
दर्द होगा, खून बहेगा
पर शायद एक दिन थम जाए
या जीना है यूँ खराशों से?
क्यूँ जीना है यूँ खराशों से?
ना गायब होती हैं, ना दर्द होता है
कुरेदो, देखें क्या है भीतर
शायद चोट अभी कायम है
क्या पता, खराशों की परतें जम गयी हैं
कुरेदो जज़्बातों को
कभी जज़्बाती नही होते?
आँखों में गहराई है
कहती है शायद चोट अभी कायम है
क्यूँ जीना है यूँ खराशों से?
छीलो इन परतों को,
दर्द होगा, खून बहेगा
पर शायद एक दिन थम जाए
या जीना है यूँ खराशों से?
क्यूँ जीना है यूँ खराशों से?
- आदित्य